Saturday, February 25, 2012

सुनो तुम..



  1. कल सुबह की मियाद है ..दरकते लम्हों के साथ दरक रहा ये खुबसूरत रिश्ता भी ?? योगी
  2. आवाज दूँ कहाँ तुझे.. कैसे तुझे पुकारूँ .. अपनेआपको पुकारना तो नासमझी होगी  !! योगी 
  3. अजब ; अजनबी सा अनजाना तेरा शहर ..कुछ धुंआ ..आँखों में जलन .. भागती जिंदगी ..रुक तो ठहर ज़रा  ठहर  ..योगी 
  4. तेरे इश्क ने है इस तरहा  सताया ...कि ढूँढा तो हर शय के बाद तुझे मुजी में पाया - योगी
  5. इस तरह जाना कि क्यूँ ...सूखे पत्तों सा मिटना !होता है ये भी कभी - कभी ...नयी कोंपल का खिलना ..योगी
  6. थोड़ी ही पी थी हाला हालात  की ..पर असर कुछ अलग ..अंदाज़ कुछ अलग - योगी
  7. कुछ इस तरहा होती है बातें ..आजकल ...की जैसे घटाएं पिघल रही हों !!
  8. आँखों में छिपे है कई खुशनुमा सदियों के जज्बात..इनको यूँ छुपाया तो न करो
  9. जाने कब से है ये रूहानी सफर..यूँ अजनबी सा मुस्कराया तो न करो -योगी 
  10. बहुत ऊँचे है महल उनके चीटी से नज़र आतें है ..पर जब मिलती है परवाज़ हम को तो बाज़ बन जातें है !सावधान
  11. पिघल रहा आसमाँ ..सहला रही नम बूदें अहसास मेरे ..गहराता अंधेरा दिन मे..धरा सुवास आसपास मेरें..योगी
  12. यो यो करना तो याद रहा ...जय सियाराम भूल गया...याद तो रहा उसे डार्लींग का गिफ्ट...माँ की दवाई भूल गया
  13.   गुज़र गए है लम्हे कई बिन तेरे ।जाने है तुजको ख्वाब ये मेरे।।खोजती रही निगाहें बैचैन सी ।थीं ना होके भी जीवन में मेरे ।। -योगेश 'योगी'

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