2018 में लिखी "शहर" शृंखला की भाव रचना आपकी नज़र ....
Friday, June 28, 2024
"रहस्यवादी रात" पुरानी रचना
Wednesday, June 26, 2024
साया
इंतजार में तड़पती रही, रूह भी बेकरार क्यों राहों में बिछे कांटे, मुझसे दूर मेरा प्यार क्योंशेर
नीगाहें हर पल ढूंढें, साया तेरा हर ओर
दिल में लगी आग, बुझाने आया तू किस ओर चाँदनी रात में तन्हाई, तेरे बिन ना चैन आए सन्नाटे की आहट में, तेरी आवाज़ क्यों ना आए दिन गुज़रें और रातें, इंतजार में हैं ढलती यादों की परछाईं, आँखों में क्यूं हैं जलती हर मोड़ पर ढूँढा तुझे, हर गली और हर डगर तेरे बिन ये जिन्दगी, लगती है जैसे बसर
मकता:
' योगी' की यह गजल, दिल से निकली है पुकारइंतजार की इन राहों में, कब होगी मुलाकात यारयोगेश ' योगी '
नयन
Saturday, June 8, 2024
गलियाँ
मेरे कुछ भाव शब्दों के साथ ज़िंदगी का एक नज़रिया पेश है -
Thursday, June 6, 2024
हास्य रस के साथ कल की कहानी
आज विश्व
पर्यावरण दिवस है,
Friday, May 31, 2024
यादें
दालान के नीचे छिपा सपना,
पुराने घर की सीलन से लिपटा,
मिट्टी का चूल्हा सिसक रहा,
धुआँ आँखों में बस गया है।
बुनी थी जो यादें, उन गलियों में,
वो अब भी बिखरी हैं सन्नाटों में,
कभी चूल्हे की आंच में तपतीं,
कभी सीलन की नमी में भटकतीं।
दरवाज़े की चरमराहट में,
बीते लम्हों की आहट है,
उन कोनों में गुज़रे दिनों की,
खामोशियों की बगावत है।
छत पर टपकता पानी कहता,
कहानियाँ उन पुरानी दीवारों की,
जहाँ हर ईंट पर लिखा है,
सपनों का हिसाब किताब।
दालान के नीचे छिपा सपना,
अब भी है वहीं कहीं दबा,
चूल्हे की राख में ढूंढ़ता,
वो बिछड़ा हुआ सिलसिला।
योगेश ' योगी'
Friday, June 10, 2016
अनर्गल बस यूँ ही
for vb-
लगता है या तो गर्मी का कहर है या फिर ग्रुप की ना फिकर है।।
एक हम ही रिश्तों की अंगीठी में शब्दों की चिंगारी दे रहे है ।।
वरना किसे याद है अब इधर लौटना ।।
बहुत हताश हूँ , आप सबकी इस ख़ामोशी से ।।
समय मेरे पास भी थोडा है ।
अगर आपका इतना कीमती है तो-योगी ☺
2
सुकूने खयाल हो ,अनबुझा सा सवाल हो।
अपना सा कोई पल,दुरी से भरा मलाल हो।-योगेश 'योगी'
Yogesh 'yogi': ये स्नेहसिक्त बिल्लोरी कजरारी अँखियाँ , लगता है हर अगली दिवार ,झरोखे से झांकती है मुझे । ये बिल्लोरी प्यारी सी अँखियाँ
4
Yogesh 'yogi': ये मीठी मधुर मुस्कान , बनाती मेरी मुखर जान।तड़प रहती तुझे देखने को,कब होगा न जाने मुझपर अहसान ।।
5
भीना सा अहसास हो,मेरी कहानी में खास हो।।
कैसे कह दूँ जुदा हो ,यंही हर वक्त आस पास हो।।
6
तेरी गहरी आँखों की गहराई में डूब जाउ । आ के तुझे ख्वाबों में गुनगुनाऊँ ।।
ॐ
तेरे मेरे ये नेह तागे ..बुने हज़ारों चटख रंग संग पिया।।-योगी
हर्फों में से 'हुआ जो हुआ 'नहीं 'काश'लेते हैं।
हम ठंडी राख से भी पुराने गुलाब तलाश लेते हैं।।-योगेश 'योगी'
दिखता जो हर तरफ उजला और स्याह ।
महसूस हुआ और सुनी जो चर्चा ।।
पता नहीं क्या झूठ और कितना सच्चा ।-योगी
ऐ जिंदगी ,क्यूँ यकीं नहीं होता तू इत्ती पास भी है क्यूं इतनी दूर भी फिर।सांस कभी थमी सी आह भी उभर उभर की सिहर।।ये सजा है किस जुर्म की कि जिसे जिया पल पल वो एक पल भी न पा सका पलक सिर्फ राहें बस नहीं मंझिल उधर की इधर -योगी
Tuesday, June 7, 2016
चूँटियो
डापाचुक कहानी
म्हारो दिल गबरावे ,जीव डबका खावे।
अणि मेंगारत घर कित्तर बसावे ।।
छोर्यांवाला श्यावे,छोरो कतरो कमावे ।।
महारो दिल गबरावे ,जीव डबका खावे ।
वणा नोकरी बापू बांथ्या खावे ।।
का रे गोळ्गप्पा -थैलो क्यूँ नी लगावे ।
म्हारो दिल गबरावे ,जीव डबका खावे ।।
आरछण री चाशनी ,गुलब्जाम्बु खावे।।
योग्यता रा अत्तर रो बापू फुम्बो लगावे ।
म्हारो दिल गबरावे ,जीव डबका खावे ।।
यो आजकाले कई वेइरयो है ।
जटी देखो वटी मास्टर रोईरयो है।।
भोला मनख ने प्रशासन गाबा जूं।
कुटी -कुटी ने धोइरयो है।।
हंगता रा फोटु लेइरयो है।।
यो आजकल कई वेइरयो है..
अबे कठे जानो ?वावलो वेइरयो है।।
यो आजकल कई वेइरयो है..
गाड़ी बापड़ा री गड बड़ कर री।।
मिने मिने रोइने आंख्या खोइरो है।
यो आजकल कई वेइरयो है ..
योगेश अमाना 'योगी '
Sunday, May 8, 2016
लघु कथाएं
-एक ज्योतिषी लड़के का हाथ देख रहा था । अंत में सब बाते पूछ लड़के ने पूछा -मेरी शादी कब होगी।
ज्योतिषी बोला -25 की उम्र में ।
लड़का हतप्रद हो झट से बोला -पर अभी तो आपने कहा 50 वर्ष और जियूँगा ।।
Tuesday, March 29, 2016
ग़ज़ल
1.
कि अब मुहब्बतों का ,तकाज़ा किया न जाए ।
फ़िज़ां में है घुलता धुंआ, भरोसा किया न जाए ।।
परिंदों की ये उड़ानें, पिंजर दफ़न न हो ।
परों में है आज़ादी उन्हें,तन्हा किया न जाए।।
चुराकर रोटी का टुकड़ा,क्या जायेगी भूख तपन ।
मासूम थे वो हाथ ,तमाशा किया न जाए ।।
खिली थी वो कली के,मुस्करा के जहां में ।
जननी है वो उसको तो ,रुखसत किया न जाए।।
'योगी'वो धरती सींचकर,देते हमें दाना ।
मंदिर सा है दिल उनका ,फना किया न जाए ।।
योगेश अमाना 'योगी'
2.
सरहदों की बंदिशों से अब लगता है ।
कोई काली रातों ,यादों में जगता है ॥
खुश्क रेतीली हवाओं की झुलसन ।
कोई ठंडी राखों में भी सुलगता है ॥
'योगी' जंजीरों में जकड़ा बेगुनाह वो ।
पल- पल बेरहम वक्त भी उसे ठगता है॥
-योगेश अमाना 'योगी'
3.
सुबह -शाम कही सुनी बातें ,कि जाहिल मै था।
और जुबां पे आ ही ना पाया,जो मेरे दिल में था ।।
भटकते रहे उसकी तलाश में दर -ब- दर चातक से।
तूफां को मंजिल समझ भुला, कि क्या साहिल में था।।
गुजरते बादल ने बरसते कहा ,'योगी 'गैर हुआ है अपना ।
हंसते -हंसते आँखों में पानी ,भूल गया महफ़िल में था।।
-योगेश अमाना 'योगी'
4
वक्त लौटा दो सावन ,नफ़ा हो जाये।
मेरा जिस्म मुझसे भले खफ़ा हो जाये।।
गुजरे वो पल बीते वो मंजर फिर।
मेरी सिली यादें बेवफा हो जाये।।
'योगी 'वो रूठा तो रूठा सही मगर।
अबकी बारिश फिर वफ़ा हो जाये ।।
-योगेश 'योगी'
Wednesday, February 24, 2016
दोहा
1.भोले तोरी चाह में ,योगी भयो मलंग ।
सब में शिव को ढूंढता ,भंग सु चढ़ी तरंग ।।
योगेश अमाना 'योगी'
(दोहा ,छन्द)
2. वो खोजे ,मै भी तकूँ ,सब ढूंढत हे उजास ।
दर -दर क्यूँ मारा फिरे,घट मा छुपी हे प्यास।।
-योगेश अमाना 'योगी'
(दोहा ,छन्द)
3.
समय की चाकी चली ,भाव - बिम्ब पीस गए ।
जाकी थी तलाश मोय,ज़रा बात क् रिस गए ।।
योगेश अमाना 'योगी'
(छंद -दोहा)
Tuesday, February 9, 2016
एक गीत-
एक गीत-
मिलना बिछड़ना होता है ,जीवन ऐसा होता है।
आगे देखो,बढ़ते रहो ,हर पल खुशिया बोता है।।
1.खिलता है गुल के बगियाँ में ,खुशिया सभी को बांटे वो ।
खुशबु फैलाये ,मुस्काने भी ,मस्ती के रंग भी छांटें वो ।।
मन वो मन है जो हर पल ही,दुखियों के आंसू धोता है ।
..
मिलना बिछड़ना होता है ,जीवन ऐसा होता है।
आगे देखो,बढ़ते रहो ,हर पल खुशिया बोता है।।
2.मिलते है दोस्त यूँ राहों में ,की राह कुछ आसान हो।
हरते है दर्द अंतस के ,जिस्म जुदा एक जान हो ।।
वक्त है राहें बदलने का , लम्हा हर इक रोता है ।
..
मिलना बिछड़ना होता है ,जीवन ऐसा होता है।
आगे देखो,बढ़ते रहो ,हर पल खुशिया बोता है।।
- योगेश अमाना 'योगी'
Sunday, January 31, 2016
रश्मियाँ..
रश्मियाँ..
Sunday, January 17, 2016
बिम्ब
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स्वेद बूंद जरा - जरा , सींच रहा रोज धरा !
सर्व हित को जिया जो, वक्त को भी हरा हरा !!
नमन श्रममूर्ति ( मजदुर दिवस )
योगेश अमाना'योगी'
स्नेह ओस यूँ भीगी री अँखियाँ ,बरस बाद बंधन में सखियाँ ।। -योगी




